नई दिल्ली/नोएडा: डिजिटल दौर में सोशल मीडिया के जरिए लोगों को शेयर बाजार और पर्सनल फाइनेंस का ज्ञान बांटने वाले Financial Influencers को लेकर एक बेहद चिंताजनक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। CFA इंस्टीट्यूट * की हालिया रिपोर्ट और मनीकंट्रोल के विश्लेषण के अनुसार, भारत में केवल *6.3% वित्तीय कंटेंट क्रिएटर्स ही भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) से पंजीकृत हैं।
इसके बावजूद लगभग 33.3% यानी हर तीसरा फिनफ्लूएंशर (1 in 3) बिना किसी आधिकारिक लाइसेंस के अपने फॉलोअर्स को सीधे शेयरों (Stock Recommendations) की खरीद-बिक्री की सलाह दे रहा है।
प्रमुख समाचार : CFA इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष
- लाइसेंस और सलाह में बड़ा अंतर: रिपोर्ट में 48 प्रमुख फिनफ्लूएंशर्स के डेटा का विश्लेषण किया गया, जिसमें से केवल 3 क्रिएटर ही SEBI रजिस्टर्ड पाए गए। सीधे शेयर की सिफारिश करने वाले 16 क्रिएटर्स में से 14 बिना किसी मान्यता या लाइसेंस के काम कर रहे हैं।
- पारदर्शिता और हितों के टकराव का अभाव: अध्ययन के अनुसार, 37.5% फिनफ्लूएंशर्स अपने व्यावसायिक फायदों और स्पॉन्सर्ड कंटेंट का खुलासा नहीं करते। वहीं 27.1% क्रिएटर्स निवेश से जुड़े शुल्क, टैक्स और लॉक-इन अवधि जैसी महत्वपूर्ण जानकारियों को छिपाते हैं।
- इंस्टाग्राम और यूट्यूब का दबदबा: वित्तीय सलाह बांटने के लिए 90% से अधिक ऑडियंस रीच इंस्टाग्राम (46.7%) और यूट्यूब (45.3%) पर केंद्रित है। इसमें शार्ट वीडियो फॉर्मेट्स जैसे Reels का प्रयोग सबसे ज्यादा किया जा रहा है।
- कार्रवाई के बावजूद धड़ल्ले से चल रहा खेल: सेबी द्वारा अनरजिस्टर्ड फिनफ्लूएंशर्स पर सख्ती बरते जाने और जुर्माना लगाए जाने के बावजूद नियमों का उल्लंघन जारी है। लगभग 4.2% क्रिएटर्स पूर्व में सेबी की पेनल्टी झेल चुके हैं।